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भाषा जितनी सरल बनेगी, उतनी ही जनमानस तक फैलेगी: प्रो. आलोक मिश्रा, विश्व हिन्दी दिवस पर मेवाड़ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

भाषा जितनी सरल बनेगी, उतनी ही जनमानस तक फैलेगी: प्रो. आलोक मिश्रा

हिन्दी जब होगी मन की भाषा, तभी बनेगी जन की भाषा: बसंती पंवार

हिन्दी सरलतम अभिव्यक्ति का स्तोत्र है, यह कभी सूख नहीं सकती: डॉ० दौलतराम शर्मा

विश्व हिन्दी दिवस पर मेवाड़ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

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चित्तौड़गढ़(लाइव स्टोरी -अमित कुमार चेचानी)। यदि हिन्दी को आगे बढ़ाना है तो घर में हिन्दी बोलने के लिए बच्चों को प्रेरित करना होगा। हिन्दी जब मन की भाषा बनेगी तभी जन की भाषा बनेगी। उक्त बातें मेवाड़ विश्वविद्यालय में विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में साहित्यकार बसंती पंवार ने बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने आगे कहा कि हिन्दी की विशेषता यही है कि हर भावना के लिए इसके पास शब्द हैं। यह एक वैज्ञानिक भाषा भी है। बतौर मुख्य वक्ता डॉ० दौलतराम शर्मा ने कहा कि हमें इस बात के लिए चिंतित होने की जरूरत नहीं है। हिन्दी एक सरलतम अभिव्यक्ति का ऐसा स्त्रोत है जो कभी सूख नहीं सकती। हिन्दी न कभी मरी हैं न कभी मरेगी। उन्होंने हिन्दी को रोजगार की भाषा बनाए जाने के लिए विभिन्न अवसरों का ज़िक्र करते हुए कहा कि अनुवाद, हिन्दी पत्रकारिता, कार्पोरेट जगत में हिन्दी सामग्री तैयार करने हेतु जॉब की अपार सम्भावनाएं हैं। मेवाड़ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक मिश्रा ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि जब तक किसी भी लिपि का प्रयोग होता रहेगा, तब तक वह जीवित रहेगी। उन्होंने विभिन्न नगरीय सभ्यताओं के पतन के कारणों पर विमर्श रखते हुए कहा कि रुढ़िवादिता और भाषाओं के प्रति दृढ़ता के भाव ने कई भाषाओं को ख़त्म कर दिया। इसलिए हमें भाषाओं को सरल बनाने पर जोर देना होगा। भक्तिकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भक्तिकाल के संतो ने हिन्दी को सरल बना कर इसे जन-जन तक पहुँचा दिया।  प्रति कुलपति आनन्द वर्द्धन शुक्ल ने कहा कि विश्व भर में हिन्दी को प्रचारित प्रसारित करने के लिए विश्व स्तर पर अथक प्रयास किए गए हैं और किये जा रहे हैं। उन्होंने विभिन्न देशों के अपनी यात्राओं और अनुभवों को साझा करते हुए हिन्दी भाषा की महत्ता को रेखांकित किया। स्वागत उद्बोधन देते हुए हिन्दी विभाग की अध्यक्ष डॉ० शुभदा पाण्डेय ने हिन्दी की वर्तमान स्थिति पर विचार रखते हुए कहा कि आज पढ़ने की प्रवृत्ति कम होती जा रही है। आज इंटरनेट ने युवाओं में पढ़ने के लिए आवश्यक स्थिरता को कम कर दिया है। हमें इस पर चिंतन करने की आवश्यकता है। विषय प्रतिस्थापना करते पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉ० सुमित कुमार पाण्डेय ने इस वर्ष की थीम पर ध्यान केन्द्रित कराते हुए कहा कि हमें हिन्दी को जनमत की भाषा बनाने के लिए प्रयास करने होंगे वो भी किसी राज्य की मातृभाषा की महत्ता को कम किए बगैर। उन्होंने हिन्दी को रोजगार की भाषा बनाने के लिये विचार-विमर्श व कार्य करने की जरूरत बताई। कहा कि रोजगार की भाषा ही हिन्दी को अनिवार्य बना देगी। इस अवसर पर हिन्दी व डीएलएड के विद्यार्थियों ने छायावाद कविता पर नाट्य प्रदर्शन किया। डॉ० त्रिगुणातीत जैमिनी ने सितार पर संगत करते हुए और हरिओम गन्धर्व ने तबले पर संगत कबीर भजन प्रस्तुत किया। बालकवि जयवीर सिंह राठौड़ ने हिन्दी पर स्वलिखित कवितापाठ किया। कार्यक्रम का आरम्भ सरस्वती वंदना, कुलगीत, हिन्दी गीत से तथा समापन राष्ट्रगान से हुआ। अतिथियों का परिचय हिन्दी के छात्र सत्यनारायण रेगर ने दिया। संचालन अब्दुल सत्तार ने तथा आभार संगोष्ठी की संयोजिका डॉ० शुभदा पाण्डेय ने की। इस अवसर पर ललित कला संकाय की अध्यक्ष प्रो. चित्रलेखा सिंह, प्रो. हरि सिंह चौहान, डॉ० पूजा गुप्ता, डॉ० सोनिया सिंगला, डॉ० जितेन्द्र वासवानी, वंदना चुण्डावत, निरमा शर्मा, लविना चपलोत, राजेश्वरी भाटी, संचिता कर्णिक, मृदुला सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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