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*मेवाड़ विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट विभाग ने आर. डी. बर्मन के गीतों को संगीत के द्वारा दी स्वरांजलि*

*हमें तुमसे प्यार कितना…महान संगीतकार आर डी बर्मन को पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि*

*मेवाड़ विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट विभाग ने आर. डी. बर्मन के गीतों को संगीत के द्वारा  दी स्वरांजलि*

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चित्तौड़गढ़। हिंदी फिल्म संगीत में आर. डी. बर्मन एक ऐसा नाम है जिन्होंने हिंदुस्तानी संगीत के साथ पाश्चात्य संगीत का एक ऐसा मिश्रण तैयार किया था, जिस पर सत्तर के दशक में पूरा देश झुमने को मजबूर हो गया था।
दिनांक 4 जनवरी बुधवार को संगीतकार आरडी बर्मन की पुण्यतिथि पर मेवाड़ विश्वविद्यालय फाइन आर्ट विभाग  द्वारा संगीत विभाग के माध्यम से स्व. संगीतकार आरडी बर्मन को पेश की गई।
इस अवसर पर फाइन आर्ट विभाग डीन प्रो डॉ. चित्रलेखा सिंह ने आर डी बर्मन की संगीत के क्षेत्र में अद्भुत क्षमता का परिचय देते हुए कहा कि हिंदी फिल्म संगीत में उनका यह एक प्रयोग ही था जिसके तहत उन्होंने न केवल संगीत की धुनों में क्रांतिकारी परिवर्तन किया बल्कि संगीत के बोल और स्वर को भी नए जमाने के साथ ढाल दिया था। वे संगीत में प्रयोग के हिमायती थे, यही वजह है कि अपने जीवनकाल में उन्होंने न केवल हिंदी सिनेमा को बल्कि बंगाली, तमिल, तेलगु और मराठी सिनेमा को भी हर प्रकार के सुरों से संवारा है।  संगीत के क्षेत्र में अद्भुत योगदान के कारण ही इन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों में एक माना जाता है। करीब डेढ़ दशक के दौरान विभिन्न भाषाओं की 300 से अधिक फिल्मों में संगीत दिया।

*अंतर्राष्ट्रीय कलाकार प्रो. जैमिनी  के सितार की धुन व गायक अमित और रौशनी की आवाज़ का चला जादू*

इस अवसर पर विश्वविख्यात अंतर्राष्ट्रीय कलाकार संगीत विभाग के प्रो. त्रिगुणातीत जैमिनी ने फ़िल्म सत्ते पे सत्ता का गीत प्यार हमें किस मोड़ पे ले आया को सितार पर बजाकर सुनाया और गीत में उपयोग में ली जाने वाली राग दरबारी कानडा के बारे में जानकारी दी। डॉ जैमिनी ने बताया कि आरडी बर्मन ने सिर्फ पाश्चात्य धुन पर ही नहीं बल्कि शास्त्रीय संगीत रागों में रचित फिल्मी गीत भी बनाये। इसमें अमर प्रेम, इजाजत मासूम, किनारा, खुशबू आदि  फिल्मों में शास्त्रीय संगीत का प्रयोग किया। कार्यक्रम में तबले पर संगीत प्राध्यापक हरिओम गंधर्व  ने शिरकत की।
हरफनमौला कलाकार व ब्रांड मैनेजर अमित चेचानी  व संगीत प्राध्यापिका गायिका रौशनी कसौधन ने आर डी बर्मन के संगीत से सजे एक से बढ़कर एक एकल व युगल गीत  सागर किनारे  दिल ये पुकारे, जाने कैसे कब कहाँ, अगर तुम ना होते, हमें तुमसे प्यार कितना, ओ हंसिनी कहां उड़ चली, ऐसे ना मुझे तुम देखो, यह जमी गा रही है,  रोज रोज आंखों तले, बड़े अच्छे लगते हैं, जिधर देखूं तेरी तस्वीर जैसे सुपरहिट सदाबहार गीत गाये। आयोजन में ब्रांड मैनेजर चेचानी ने जानकारी दी कि पंचम को सन 1983  में सनम तेरी कसम,  1984 में मासूम 1995 में फ़िल्म 1942 ए लव स्टोरी के बेहतरीन संगीत के लिए फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार भी मिला। 1942 ए लव स्टोरी उनके निधन के बाद प्रदर्शित हुई।  उनका 04 जनवरी 1994 को निधन हुआ था।
प्रो. राजर्षि कसौधन ने कार्यक्रम में जानकारी दी कि आज भी कई स्टेज व संगीत कार्यक्रमों में संगीतकार आर.डी. बर्मन के संगीत से सजे हुए गीत लोगों की जुबान पर छाए रहते हैं और संगीत प्रेमियों को थिरकने पर मजबूर करते हैं। इस अवसर पर उन्होंने आर डी बर्मन के जीवन से जुड़ी घटनाओं को भी शेयर किया। कार्यक्रम में विभाग के गोपाल बारठ, लीला पुरोहित व संगीत, पेंटिंग  के विद्यार्थी उपस्थित रहे और कार्यक्रम का आनंद उठाया।

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